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बुजुर्गों के लिए पोस्टल बैलेट की उम्र सीमा 85 साल बढ़ी

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On: March 2, 2024 11:47 AM
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चुनाव महापर्व 2024
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चुनाव महापर्व 2024: भारत में वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव आने वाला है, इसे महज चुनाव नहीं बल्कि महापर्व के रूप में मनाया जाना है। आपको बता दें की इस चुनाव में शामिल होने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम भी हैं जिसे जानना आवश्यक है।

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भारतीय इलेक्शन में शामिल होने के मुख्य नियमों में से कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:

  1. उम्र: निर्धारित उम्र का होना, जैसे कि 18 वर्ष या उससे अधिक, वाले व्यक्ति विभिन्न स्तरों के इलेक्शन में भाग ले सकते हैं।
  2. नागरिकता: इलेक्शन में भाग लेने के लिए भारतीय नागरिक होना आवश्यक होता है।
  3. मतदान पंजीकरण: मतदाताओं को मतदान पंजीकरण सूची में शामिल होना आवश्यक होता है।
  4. चुनावी प्रक्रिया का पालन: चुनावी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होता है, जैसे कि मतदान की तारीखों, प्रतियोगिताओं के लिए नियम, और अन्य विधियां।
  5. प्रतिनिधि चुनाव: राष्ट्रीय और राज्य स्तर के प्रतिनिधि चुनाव में उम्मीदवारों को नियुक्त करने के लिए विशेष नियम होते हैं।

ये मुख्य नियम होते हैं जो भारतीय इलेक्शन में शामिल होने के लिए अनुपालन किए जाने चाहिए।

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जमशेदपुर मुखिया संघ का एक प्रतिनिधिमंडल सांसद श्री विद्युतवरण महतो जी से मुलाकात किया।

मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए स्वीप एक्टिविटी में भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील, चैंबर सदस्यों को दिलाई गई मतदाता शपथ, मतदाता क्वीज में बढ़ चढ़कर सदस्यों ने लिया भाग.

सबसे जरूरी खबर बुजुर्गों के लिए:

केंद्र सरकार ने पोस्टल बैलेट के जरिए वोट करने के लिए उम्र सीमा 80 साल से बढ़ाकर 85 साल कर दी है। इसका मतलब है कि 85 साल से कम उम्र के बुजुर्गों को अब वोट डालने के लिए मतदान केंद्रों पर जाना होगा। 80 साल से ऊपर के बुजुर्गों को पहले से ही पोस्टल बैलेट की सुविधा मिली हुई थी।

यह फैसला चुनाव आयोग से विचार-विमर्श करने के बाद लिया गया है। पिछले 11 विधानसभा चुनावों में 80 साल से ऊपर के 97-98 फीसदी बुजुर्गों ने पोस्टल बैलेट के बजाय मतदान केंद्रों पर जाकर वोट डाला था। इसे देखते हुए सरकार ने 2020 में किए गए इस प्रावधान में संशोधन किया है।

चुनाव संचालन नियमों के अनुसार, 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, विकलांग व्यक्तियों, चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मियों और सेना के कर्मचारियों को पोस्टल बैलेट की सुविधा दी जाती है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में कोविड-संक्रमित व्यक्तियों को भी यह सुविधा दी गई थी।

मतगणना के दौरान सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती होती है, उसके बाद ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती होती है। पोस्टल बैलेट की संख्या कम होती है और ये कागज के मतपत्र होते हैं, इसलिए उन्हें आसानी से गिना जा सकता है।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने उन 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी, जहां हाल ही में विधानसभा चुनाव हुए हैं। इस बैठक में पता चला कि 80 साल से ऊपर के मतदाताओं में से सिर्फ 2-3% बुजुर्गों ने ही पोस्टल बैलेट का विकल्प चुना था; बाकी लोगों ने वोट डालने के लिए मतदान केंद्र पर आने का विकल्प चुना था। देश भर में 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों की कुल संख्या 1.75 करोड़ है, जिनमें 80-85 साल की उम्र वाले लोगों की संख्या 98 लाख है.

मुख्य बिंदु:

  • पोस्टल बैलेट के लिए उम्र सीमा 80 साल से बढ़ाकर 85 साल कर दी गई है।
  • 85 साल से कम उम्र के बुजुर्गों को अब मतदान केंद्रों पर जाना होगा।
  • यह फैसला चुनाव आयोग से विचार-विमर्श करने के बाद लिया गया है।
  • पिछले चुनावों में 80 साल से ऊपर के 97-98 फीसदी बुजुर्गों ने मतदान केंद्रों पर जाकर वोट डाला था।
  • देश भर में 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों की कुल संख्या 1.75 करोड़ है।

भारत में इलेक्शन विभिन्न स्तरों पर होते हैं। यहाँ कुछ मुख्य इलेक्शन की तिथियाँ हैं:

  1. लोकसभा चुनाव: ये पांच वर्ष में एक बार होते हैं।
  2. विधानसभा चुनाव: विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं।
  3. नगर निगम/पंचायत चुनाव: नगर निगम और पंचायतों के चुनाव भी नियमित अंतरालों पर होते हैं।

इन चुनावों की तिथियाँ विभिन्न तत्वों पर निर्भर करती हैं, जैसे कि राजनीतिक परिस्थितियाँ, संविधानिक प्रावधान आदि।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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