गोरखपुर: के गोरखपुर जिले में जमीन हड़पने की एक चौंकाने वाली साजिश सामने आई है। आरोप है कि जालसाजों ने 46 साल पहले मृत व्यक्ति की पत्नी बताकर एक महिला के नाम फर्जी दस्तावेज तैयार किए और एक एकड़ से अधिक जमीन की वरासत व रजिस्ट्री करा दी। मामले के उजागर होते ही तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
खजनी थाना क्षेत्र के डोहरियां प्राणनाथ गांव का मामला
यह पूरा मामला खजनी थाना क्षेत्र के डोहरियां प्राणनाथ गांव से जुड़ा है।
जानकारी के अनुसार गांव निवासी निठुरी प्रसाद की 12 सितंबर 1979 को हत्या हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी परभौती का 20 अक्टूबर 1981 को निधन हो गया था दंपती की कोई संतान नहीं थी, इसलिए 30 मार्च 1993 को उनकी संपत्ति छोटे भाई विंध्याचल के नाम दर्ज कर दी गई थी।
फर्जी पत्नी बनाकर तैयार किए गए दस्तावेज
आरोप है कि कई वर्षों बाद जालसाजों ने भानमती नामक महिला को निठुरी प्रसाद की पत्नी बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए।
इतना ही नहीं:
- पूर्व ग्राम प्रधान के कथित नकली हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया
- कुटुंब रजिस्टर में भी महिला का नाम दर्ज करा दिया गया
- तहसील स्तर पर भी हेरफेर कर जमीन की वरासत उसके नाम करा दी गई
फिर तीन लोगों के नाम कर दी जमीन की रजिस्ट्री
आरोप है कि जमीन अपने नाम कराने के बाद भानमती ने उस जमीन को तीन अन्य लोगों के नाम रजिस्ट्री कर दी इस तरह पूरी साजिश जमीन हड़पने के लिए सुनियोजित तरीके से रची गई थी।
असली वारिस ने कोर्ट में दी चुनौती
मामले की जानकारी मिलने पर असल वारिस विंध्याचल ने तहसीलदार न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए।
उन्होंने बताया कि:
- भानमती का इस परिवार से कोई संबंध नहीं है
- वह बांसगांव तहसील क्षेत्र की रहने वाली है
- उसकी शादी कहीं और हुई है
तहसीलदार ने रजिस्ट्री और कब्जे पर लगाई रोक
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह ने जमीन की रजिस्ट्री और कब्जे पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
कैंसर से जूझ रहा वारिस, फिर भी न्याय की लड़ाई जारी
विंध्याचल इस समय कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने न्याय के लिए लड़ाई जारी रखी है उनके पुत्र मलखा ने भी मामले को आगे बढ़ाते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जमीन घोटालों में बढ़ रही फर्जीवाड़े की घटनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि जमीन विवादों में फर्जी दस्तावेज, नकली हस्ताक्षर और रिकॉर्ड में हेरफेर के मामले लगातार सामने आ रहे हैं ऐसे मामलों को रोकने के लिए:
- भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल सत्यापन
- और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में कड़ी निगरानी जरूरी है।
- गोरखपुर का यह मामला जमीन कब्जाने के लिए रची गई एक बड़ी साजिश को उजागर करता है। फिलहाल तहसील प्रशासन ने जमीन पर रोक लगा दी है और मामले की जांच जारी है।














