नई दिल्ली: भारत सरकार ने पशुपालकों और किसानों की मदद के लिए एक नई और महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अब पशुओं की आपातकालीन चिकित्सा के लिए 1962 नंबर पर एक टोल-फ्री हेल्पलाइन ‘पशुधन संजीवनी’ उपलब्ध है। इस सेवा के माध्यम से, किसान अपने घर बैठे ही बीमार या घायल पशुओं के लिए तुरंत डॉक्टर और चिकित्सा सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
कैसे काम करती है यह सेवा?
यह सेवा काफी सरल और प्रभावी है। जब किसी किसान के पशु को आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता होती है, तो उसे केवल 1962 पर कॉल करना होता है।
- कॉल करें: किसान अपने मोबाइल या लैंडलाइन से 1962 पर कॉल करते हैं।
- जानकारी दें: कॉल सेंटर का प्रतिनिधि उनसे पशु की स्थिति और उनके स्थान की जानकारी लेता है।
- मदद पहुँचेगी: कॉल की जानकारी के आधार पर, कॉल सेंटर पास की मोबाइल वेटरनरी यूनिट को उनके पते पर भेज देता है।
- इलाज होगा: यह मोबाइल यूनिट, जिसमें एक प्रशिक्षित पशु चिकित्सक, कम्पाउंडर और ड्राइवर होते हैं, मौके पर पहुँचकर पशु का तुरंत इलाज करती है।
इस पहल का उद्देश्य
‘पशुधन संजीवनी’ हेल्पलाइन का मुख्य उद्देश्य पशुधन की गंभीर और आपातकालीन जरूरतों को पूरा करना है। यह सेवा न केवल पशुपालकों को समय पर सहायता प्रदान करती है, बल्कि इससे पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन में भी सुधार होता है। यह पहल उन किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो दूर-दराज के इलाकों में रहते हैं और जिनके लिए तुरंत पशु चिकित्सक उपलब्ध कराना मुश्किल होता है।
यह सेवा किसानों को आपात स्थिति में होने वाले नुकसान से बचाएगी और उन्हें अपने पशुओं की देखभाल करने में सक्षम बनाएगी, जो कि उनकी आजीविका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह सेवा वर्तमान में भारत के कई राज्यों में उपलब्ध है।














