चाईबासा | संवाददाता – जय कुमार : कोल्हान प्रमंडल में इस वर्ष का विश्व आदिवासी दिवस समारोह विशेष रूप से ऐतिहासिक और स्मरणीय बनने जा रहा है। आयोजन समिति ने घोषणा की है कि यह समारोह झारखंड आंदोलन के महानायक और आदिवासी समाज के मार्गदर्शक दिशुम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित किया जाएगा।
कोल्हान विश्व आदिवासी दिवस आयोजन समिति के अध्यक्ष इपिल सामड ने बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि यह कार्यक्रम 9 अगस्त को चाईबासा के सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान में आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न जिलों और राज्यों से 20 हजार से अधिक लोग भाग लेंगे।
उन्होंने कहा कि झारखंड के निर्माता दिशुम गुरु का हाल ही में निधन आदिवासी समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है, और इसीलिए इस वर्ष का आयोजन उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित किया गया है।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:
सामूहिक पारंपरिक पूजा
कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी समाज के पारंपरिक धार्मिक प्रमुखों – पहान और दिउरी – द्वारा सामूहिक पूजा से होगी, जिसमें सुख, समृद्धि और शांति की कामना की जाएगी।
श्रद्धांजलि अर्पण
कार्यक्रम स्थल पर बिरसा मुंडा, पोटो हो, दिशुम गुरु शिबू सोरेन सहित तमाम आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
विशेष रूप से दिशुम गुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए एक अलग स्थल चिन्हित किया गया है।
संस्कृति और विरासत पर जोर
कार्यक्रम में पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी समाज की कला, परंपरा और विरासत को दर्शाया जाएगा। जनजातीय कलाकारों का एक समागम भी होगा।
सम्मान समारोह
समाज के उन व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने शिक्षा, खेल, पर्यावरण, कृषि, स्वास्थ्य, संस्कृति, कला, सामाजिक कार्यों आदि में उल्लेखनीय योगदान दिया है। झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को भी सम्मानित किया जाएगा।
सादा, गरिमामय आयोजन
इस बार कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों को स्थगित कर आयोजन को सादगीपूर्ण और गंभीर रूप देने का निर्णय लिया गया है। आयोजन का उद्देश्य आदिवासी समाज की अस्मिता और आत्मगौरव को केंद्र में लाना है।
विषय आधारित संगोष्ठी
कार्यक्रम में निम्न विषयों पर वक्ता अपने विचार प्रस्तुत करेंगे:
- आदिवासी युवाओं की आधुनिक युग में भूमिका और चुनौतियां
- आदिवासी भाषा और लिपि का संरक्षण एवं विकास
- स्थानीय नीति और नियोजन नीति
- आदिवासी पहचान, अस्तित्व और अधिकार
- पारंपरिक व्यवस्था और धर्मांतरण से संरक्षण
आयोजन की अन्य व्यवस्थाएं
- भोजन व्यवस्था: सुबह 11 बजे से अंत तक सभी आगंतुकों के लिए नि:शुल्क भोजन
- लाइव प्रसारण: पूरे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा
- 100 स्टॉल: पारंपरिक व्यंजन, वस्त्र और शिल्पकला पर आधारित
- सरना झंडा: पूरे चाईबासा शहर में सरना झंडे लगाए जाएंगे
- सेल्फी प्वाइंट: आदिवासी परंपरा पर आधारित विशेष सेल्फी प्वाइंट
- सुझाव और दान पेटी: तीन मुख्य स्वागत द्वारों एवं मंच पर स्थापित की जाएंगी
आमंत्रित विशिष्ट अतिथि
- पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक चंपाई सोरेन
- राज्य मंत्री दीपक बिरूवा
- पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा
- सांसद जोबा मांझी
- पूर्व सांसद गीता कोड़ा
- विधायक दशरथ गागराई, सुखराम उरांव, सोनाराम सिंकू, जगत माझी
- जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरीन, सोनाराम सोरेन
- जिले के प्रशासनिक पदाधिकारी एवं समाज के गणमान्य लोग
आयोजन समिति के प्रमुख सदस्य
अध्यक्ष इपिल सामड, उपाध्यक्ष लालू कुजूर, सचिव रवि बिरूली, सह सचिव अशोक कुमार नाग, कोषाध्यक्ष संजय लागुरी, गब्बर सिंह हेंब्रम, अनिल लकड़ा, सहदेव किस्पोट्टा, राजकमल लकड़ा, शेर सिंह बिरुवा, सतीश सामड, विजयलक्ष्मी लकड़ा, किरण नुनिया, रोहित लकड़ा, सुभाष कच्छप, बिमला हेंब्रम, चंदन कच्छप, अंजू सामड, इंदु तियू, बेला जेराई सहित बड़ी संख्या में सदस्य आयोजन की तैयारियों में लगे हुए हैं।
इस वर्ष का विश्व आदिवासी दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी चेतना, आत्मगौरव और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प है। दिशुम गुरु शिबू सोरेन की स्मृति में समर्पित यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा भी बनेगा।








