वॉशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में हलचल तब मच गई जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत, चीन सहित 16 देशों के खिलाफ संभावित ट्रेड टैरिफ जांच शुरू करने की घोषणा की। इस फैसले को वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है व्हाइट हाउस के अनुसार यह जांच इस बात की समीक्षा के लिए शुरू की गई है कि क्या इन देशों के साथ व्यापार अमेरिका के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा रहा है।
वैश्विक बाजारों में गिरावट
घोषणा के तुरंत बाद दुनिया के कई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई निवेशकों को आशंका है कि यदि अमेरिका नए टैरिफ लागू करता है, तो इससे नया वैश्विक ट्रेड वॉर शुरू हो सकता है विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश माहौल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
🇮🇳 भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
India सरकार ने इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है नई दिल्ली ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका अनुचित टैरिफ लगाता है, तो भारत इस मामले को World Trade Organization में चुनौती देगा भारतीय अधिकारियों का मानना है कि किसी भी तरह के एकतरफा व्यापारिक प्रतिबंध वैश्विक व्यापार नियमों के खिलाफ हो सकते हैं।
चीन ने भी की आलोचना
China ने भी अमेरिका के इस कदम की आलोचना की है चीन का कहना है कि संरक्षणवादी (Protectionist) नीतियां वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक हैं और इससे दुनिया की आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा?
अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ट्रंप की “America First” नीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों को प्राथमिकता देना है हालांकि आलोचकों का कहना है कि इससे वैश्विक व्यापार में अस्थिरता और तनाव बढ़ सकता है।
वैश्विक सप्लाई चेन पर असर
अगर यह विवाद आगे बढ़ता है, तो इसका असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है:
- वैश्विक सप्लाई चेन
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते
- निवेश और शेयर बाजार
- तकनीक और विनिर्माण उद्योग
ट्रेड टैरिफ जांच की यह घोषणा आने वाले समय में अमेरिका, भारत और चीन के व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है अगर अमेरिका वास्तव में नए टैरिफ लागू करता है, तो दुनिया को एक बार फिर बड़े वैश्विक ट्रेड वॉर का सामना करना पड़ सकता है।












