कराइकेला (पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड): जहां सड़कें विकास की राह दिखाती हैं, वहीं कराइकेला प्रखंड के ग्रामीण सड़क की बदहाली से तंग आकर खेतों जैसा व्यवहार करने को मजबूर हो गए। स्थानीय लोगों और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर धान लगाकर सरकार को चेतावनी दी—”यह खेत नहीं, सड़क है!”
यह विरोध प्रदर्शन कराइकेला से केरा मंदिर जाने वाले मुख्य मार्ग की खस्ताहाल स्थिति को लेकर किया गया। रोड पर गड्ढों और कीचड़ से परेशान ग्रामीणों ने सरकार का ध्यान खींचने के लिए अनोखा तरीका अपनाया—गड्ढों में पानी भरने के बाद उनमें धान की रोपाई की गई, जैसे वह कोई खेत हो।
इस विरोध की अगुवाई JLKM युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष अजय कुमार महतो और प्रखंड अध्यक्ष अखिलेश महतो ने की। साथ में राजेंद्र मेलगांडी, संजय महतो, कुलदीप महतो, अनिल महतो, शंकर लोहार, मांहगीलाल मेलगांडी, अमित महतो, वनविहारी, शिवचरण और सहदेव समेत गांव के दर्जनों लोग शामिल हुए।
क्या कहा JLKM नेताओं ने:
“सरकार की नींद अब भी नहीं खुली तो 10 दिनों में बड़ा आंदोलन होगा।”
“सड़क इतनी बुरी हालत में है कि खेत और सड़क में फर्क करना मुश्किल हो गया है।”
“यह प्रदर्शन मजबूरी है, ताकि सरकार को असलियत दिखे।”
वास्तविकता यह है:
यह सड़क न केवल स्थानीय गांवों को जोड़ती है, बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केरा मंदिर तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है। बरसात में यह सड़क दलदल बन जाती है, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और रोज़मर्रा के यात्रियों को भारी परेशानी होती है।
विशेष संदेश
“जब सड़क खेत जैसी दिखने लगे, तो समझ लीजिए विकास की नींव खोखली हो गई है।”
यह प्रदर्शन सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि जनता की पीड़ा की ज़ुबान है। सरकार को अब इन आवाज़ों को सुनना चाहिए और स्थायी समाधान देना चाहिए।
अब समय है कि शासन-प्रशासन इस तरह की आवाज़ों को चेतावनी नहीं, संकल्प के रूप में सुने और जनता को भरोसा दिलाए कि विकास सिर्फ नारों में नहीं, ज़मीन पर भी होगा।








