चाईबासा, झारखंड: ग्रामीण भारत के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अदाणी फाउंडेशन और एसीसी का संयुक्त प्रयास एक प्रेरणादायक बदलाव ला रहा है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के बाईहातु गांव निवासी सिदियु लागुरी की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है।
अदाणी कौशल विकास केंद्र (ASDC), चाईबासा में प्रशिक्षित होकर सिदियु ने दोपहिया वाहन सर्विस तकनीशियन पाठ्यक्रम में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें वाहन प्रणाली, मरम्मत और डायग्नोस्टिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान मिला। लेकिन यह सिर्फ तकनीकी शिक्षा तक सीमित नहीं रहा — एसीसी और अदाणी फाउंडेशन ने उन्हें व्यक्तिगत मार्गदर्शन, भावनात्मक सहयोग और करियर प्लानिंग जैसी जरूरी सहायता भी दी।

इसका परिणाम यह हुआ कि सिदियु को तमिलनाडु के कृष्णागिरी स्थित धूत ट्रांसमिशन प्राइवेट लिमिटेड में एक असेंबली लाइन ऑपरेटर की नौकरी मिली। अब वह एक सुदूर ग्रामीण परिवेश से निकलकर औद्योगिक उत्पादन क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं।
सिदियु की यह यात्रा महज एक नौकरी पाने की नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के सशक्तिकरण की दिशा में चल रहे प्रयासों का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि यदि अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो सीमित संसाधनों वाले युवा भी देश के औद्योगिक विकास में भागीदार बन सकते हैं।
अदाणी फाउंडेशन और एसीसी द्वारा संचालित अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर, चाईबासा अब तक अनेक युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर चुका है। इस केंद्र का उद्देश्य है – कुशल भारत, आत्मनिर्भर भारत।
सिदियु लागुरी की सफलता उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो अवसरों की तलाश में हैं। अदाणी फाउंडेशन और एसीसी का यह साझेदार प्रयास साबित करता है कि कौशल विकास सिर्फ रोजगार नहीं देता, बल्कि आत्मगौरव और सम्मान की नई राहें खोलता है।








