रॉयटर्स की रिपोर्ट पर भारत का खंडन, कहा – “ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई”
नई दिल्ली | अंतरराष्ट्रीय डेस्क
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरान ने भारत से अपने तीन जब्त तेल टैंकर वापस मांगे हैं और इसके बदले में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का भरोसा दिया है।
हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह निराधार और बकवास बताया है। मंत्रालय का कहना है कि भारत और ईरान के बीच इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है।
तीन टैंकरों को लेकर विवाद
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने कुछ समय पहले तीन संदिग्ध तेल टैंकरों को रोक लिया था। भारत सरकार का आरोप था कि ये जहाज अपनी असली पहचान छिपाकर समुद्र में गतिविधियां कर रहे थे और जहाजों की आवाजाही से जुड़ी जानकारी में बदलाव कर रहे थे।
इन जहाजों पर यह भी आरोप है कि वे समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में अवैध तरीके से तेल और सामान का ट्रांसफर कर रहे थे।
रिपोर्ट में जिन तीन जहाजों का जिक्र किया गया है, उनके नाम हैं:
- अस्फाल्ट स्टार (Asphalt Star)
- अल जाफजिया (Al Jafzjia)
- स्टेलर रूबी (Stellar Ruby)
बताया गया कि स्टेलर रूबी पर ईरान का झंडा लगा है, जबकि अस्फाल्ट स्टार और अल जाफजिया पर क्रमशः निकारागुआ और माली के झंडे लगे हुए हैं। इन्हीं कारणों के आधार पर भारत ने इन जहाजों को रोका हुआ है।
ईरान की दवाओं और मेडिकल उपकरणों की मांग
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि ईरान ने सिर्फ टैंकरों की रिहाई ही नहीं मांगी, बल्कि भारत से कुछ खास दवाओं और मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति की भी मांग की है।
बताया गया कि इस मुद्दे को लेकर नई दिल्ली में ईरान के राजदूत ने सोमवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की, जहां इन मांगों पर चर्चा हुई।
हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि ऐसी किसी मांग या समझौते पर कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है।
भारत का स्पष्ट रुख
विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि जिन तीन जहाजों की बात हो रही है, वे सीधे तौर पर ईरान के स्वामित्व में नहीं हैं। इसलिए भारत के साथ ईरान के किसी आधिकारिक समझौते की बात तथ्यों से परे बताई जा रही है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बयान
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी पश्चिम एशिया की स्थिति और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है।
ब्रिटेन के अखबार फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा:
➡ भारत इस समय ईरान से संवाद बनाए रखने की नीति पर काम कर रहा है।
➡ हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है।
➡ दुनिया के लगभग 20% तेल का व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
जयशंकर ने कहा कि तनाव के माहौल में सीधी बातचीत और तालमेल ही सबसे प्रभावी रास्ता है। हालांकि अभी सभी भारतीय जहाजों के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बनी है और एक-एक जहाज को सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है।
भारत के लिए राहत की खबर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। भारत का एलपीजी जहाज “शिवालिक” सोमवार शाम गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंच गया।
- जहाज में लगभग 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी लदी थी
- यह जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलकर भारत पहुंचा
कच्चा तेल लेकर आ रहा एक और जहाज
भारत के झंडे वाला एक और जहाज “जग लाडकी” भी सुरक्षित रास्ते पर है।
- यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से चला है
- जहाज में लगभग 81,000 टन मुर्बन कच्चा तेल लदा हुआ है
- फिलहाल यह सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहा है
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की संवेदनशीलता को देखते हुए भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रणनीति अपना रहा है।
जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, वहीं भारत सरकार फिलहाल आधिकारिक तौर पर किसी भी ऐसे समझौते से इनकार कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत-ईरान कूटनीतिक बातचीत और समुद्री सुरक्षा का मुद्दा वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।














