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माई बहन योजना का ‘मां-बहन’ एक हो गया: चुनावी हार पर वादा धरा रह गया

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On: November 14, 2025 5:07 PM
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माई बहन योजना का ‘मां-बहन’ एक हो गया चुनावी हार पर वादा धरा रह गया
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की ऐतिहासिक हार हुई, जिसमें उनकी प्रमुख योजना “माई बहिन योजना” भी चुनावी नतीजों के बाद मजाक का विषय बन गई। “माई बहिन योजना” के तहत हर महिला को 2500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया गया था, मगर जनता ने इस वादे को पूरी तरह नकार दिया और परिणामस्वरूप “माई बहिन योजना” का नाम बदलकर लोग अब तंज़ में ‘माँ-बहन एक हो गया’ कह रहे हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 Live Result

“माई बहिन योजना” का वादा

  • महागठबंधन ने चुनाव प्रचार में यह योजना ज़ोर-शोर से लॉन्च की थी।
  • इसके तहत राज्य की महिलाओं को हर महीने ₹2500 देने का लिखित वादा किया गया था।
  • कांग्रेस और तेजस्वी यादव समेत गठबंधन के नेताओं ने खुलेआम घोषणा की थी कि सरकार बनने पर 1 साल की राशि महिलाओं के खाते में ऐडवांस दी जाएगी।

जनता की प्रतिक्रिया और चुनावी परिणाम

  • चुनाव नतीजों में एनडीए ने भारी बहुमत के साथ जीत हासिल की, जबकि महागठबंधन की सीटें 50 के आसपास सिमट गईं।
  • माई बहिन योजना का वादा जनता को आकर्षित नहीं कर सका, और विरोधियों ने इसे “वोट बैंक” के लिए ख्याली पुलाव बताया।
  • तंज़ कसते हुए लोग अब कह रहे हैं कि “माई बहिन योजना” अब बस ‘मां-बहन एक हो गया’, यानी योजना चुनावी हार के साथ खारिज हो गई।

योजना के विफल होने के मुख्य कारण

  • योजना की विश्वसनीयता जनता की नज़र में कमज़ोर रही क्योंकि पिछली ऐसी योजनाओं का क्रियान्वयन भी सवालों के घेरे में रहा।
  • चुनावी घोषणापत्र व प्रचार में महागठबंधन ने बाकी मुद्दों से अधिक इसी योजना पर फोकस किया, जिससे उनकी रणनीति एकपक्षीय दिखी।
  • एनडीए ने इस पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि ये “मुफ्तखोरी” की नीति समाज में व्यवहारिक नहीं है।

निष्कर्ष

बिहार चुनाव 2025 में “माई बहिन योजना” महागठबंधन की हार का मुख्य मुद्दा बनी। इस चुनावी नतीजे के बाद यह योजना अब एक राजनैतिक तंज़ और चर्चा का विषय बनकर रह गई है – “माई बहिन योजना” का ‘मां-बहन एक हो गया’गया’।

Disclaimer:
यह समाचार लेख केवल जनहित में सूचना और विमर्श के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसमें प्रस्तुत विचार, आंकड़े या मत लेखकों/स्रोतों के निजी हैं, न कि किसी आधिकारिक संस्था, सरकार या चुनावी आयोग के। इस आलेख में दी गई जानकारी की सत्यता, सटीकता अथवा परिणामी उपयोग के लिए जिम्मेदारी लेखक/प्रकाशक की नहीं है। पाठक अपने विवेक से तथ्यों की पुष्टि करें। योजना या राजनीति से संबंधित बातें विशुद्ध रूप से सार्वजनिक डाटा व चर्चा पर आधारित हैं, इनके परिप्रेक्ष्य में किसी तीसरे पक्ष की राय या दावे की जिम्मेदारी हम नहीं लेते हैं।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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