जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सच सामने लाने वाले कार्यकर्ता अब धमकियों का सामना कर रहे हैं। कभी किसी को हाथ जलाने की धमकी दी जाती है, तो कभी कहा जाता है कि गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सवाल पूछने पर जवाब नहीं, बल्कि जान से मारने की चेतावनियां मिल रही हैं।
RTI : सवाल पूछना बना जोखिम का काम
आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन से जवाब मांगने के बजाय, अब उन्हें चुप कराने की कोशिशें की जा रही हैं। केंद्रीय आरटीआई कार्यकर्ता संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को जमशेदपुर पश्चिम के विधायक श्री सरयू राय से मिलकर इस विषय पर ज्ञापन सौंपा और न्याय की मांग की।
श्री राय ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि वे इस मुद्दे को झारखंड विधानसभा में शून्यकाल या निवेदन सत्र में उठाएंगे।
धमकी की घटनाएं
1. कृतिवास मंडल (महासचिव, RTI संघ):
18 मई की रात उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन आया जिसमें उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
20 मई को SSP को सूचना दी, लेकिन अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
2. सुनील मुर्मू (RTI कार्यकर्ता, जादूगोड़ा):
उन्हें एक स्थानीय मुखिया द्वारा फोन पर धमकाया गया।
पुलिस ने दोनों पक्षों पर ही बीएनएसएस की धारा 126 के तहत कार्रवाई कर दी, जिससे मामला हल्का कर दिया गया।
ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
- धमकी देने वाले कृष्णा कुमार और पोटका प्रखंड कार्यालय से जुड़े दोषी पदाधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई की मांग।
- परसुडीह थाना प्रभारी फैज अहमद और डिप्टी एसपी (लॉ एंड ऑर्डर) तौकीर आलम की निष्क्रियता की जांच कराई जाए।
- RTI कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर ठोस व्यवस्था लागू की जाए।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे- वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता पूरबी घोष, कृतिवास मंडल, सुनील मुर्मू, सुलोचना देवी, अन्य RTI कार्यकर्ता
RTI एक ऐसा अधिकार है, जिससे आम नागरिक सत्ता और व्यवस्था से जवाब मांग सकते हैं, लेकिन अगर सवाल पूछने वालों को ही धमकाया जाने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
अब देखना यह होगा कि विधायक सरयू राय की पहल पर विधानसभा में इस मुद्दे पर कैसी चर्चा होती है और प्रशासन इन शिकायतों पर क्या ठोस कार्रवाई करता है।








