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जमशेदपुर वीमेन्स यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर एकदिवसीय सेमीनार का आयोजन।

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On: July 12, 2024 2:21 PM
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जमशेदपुर
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जमशेदपुर वीमेन्स यूनिवर्सिटी के

जमशेदपुर : प्रांगण में Balancing our future , Nurturing sustainable population Growth ‘ विषय पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माननीय कुलपति प्रो० डॉ० अंजिला गुप्ता, बीज वक्ता डॉ सोमक विश्वास, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ० किश्वर आरा, प्रोक्टर डॉ० सुधीर साहु, कुलसचिव श्री राजेन्द्र जयसवाल एवं अध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग डॉ रत्ना मित्रा डायस में उपस्थित थे । कार्यक्रम का प्रारंभ में परम्परागत तरीके से अतिथियों का स्वागत किया गया।

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छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ० किश्वर आरा द्वारा स्वागत भाषण दिया गया अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि माननीय कुलपति प्रो० डॉ अंजिला गुप्ता के मार्गदर्शन से इस कार्यक्रम का सम्पादन हो सका है। कुलपति समेत सभी अतिथियों का स्वागत किया । सेमीनार में सन्त कोलम्बस विश्वविद्यालय से आए बीज वक्ता के रूप डॉ० सोमक विश्वास ने अपने वक्तव्य में कहा कि कहा परम्परागत अर्थव्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए तीन E’ s of sustainability में ‘ , इक्वीटी, इकोनॉमी एवं इकोलॉजी पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।

2018 में जनसंख्या बढ़कर।1950 में 2 .5 बिलियन जनसंख्या हो गई।लेकिन अभी 8 .। बिलियन जनसंख्या है। 2030 में 8.5बिलियन, 2050 जनसंख्या में इस तरह बढ़ोत्तरी होना एक बड़ी समस्या हैं। जैसे जनसंख्या बढ़ेगी तो भोजन की समस्या । कोरोना काल में पलायन की समस्या भारी संख्या में आई। उन्होंने बताया कि सतत विकास को ऐसे विकास के रूप में परिभाषित किया जाता है जो भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता से समझौता किए बिना वर्त्तमान पीढ़ी की जरूरतों को पूरी करता है।

जमशेदपुर

मानीनय कुलपति प्रो० डॉ अंजिला गुप्ता ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि 1987 मे कुल जनसंख्या 5 अरब थी और वर्त्तमान समय में जनसंख्या बढती ही जा रही है। 11 जुलाई के दिन विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। यदि विकसित देशो से तुलना करें तो भारत में युवा जनसंख्या ज्यादा है। दूसरी जगहों में बुर्जुगों की संख्या ज्यादा है। युवा जनसंख्या में 5 प्रतिशत तक – ही शिक्षित है। बेरोजगारी बढ़ने से समाज में अव्यस्था उत्पन्न होती है। कई चुनौतियाँ जैसे नक्सल वाद , बेरोजगारी की समस्या सामने आती है।

इस जनसंख्या को कैसे प्रोडक्टिव बना सके इस पर विचार करना जरूरी है। विश्वविद्यालय में सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है ताकि हमारी छात्राएँ नियमित कक्षाओं के साथ एक स्किल डेवलपमेंट करें ताकि आगे चलकर रोजगार से जुड़ सके । यह भी विश्वविद्यालय की ओर से बेहतर प्रयास है कि बढ़ती जनसंख्या के इस समय में अधिक से अधिक छात्राएँ रोजगारपरक शिक्षा प्राप्त कर स्वावलम्बी बन सके । विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का उद्देश्य ही है कि जनसंख्या को कैसे संतुलित किया जाए एवं समाज को कैसे जागरूक किया जाए।

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पटना विश्वविद्यालय की डॉ पुष्पा ने अपने वक्तव्य में कहा विश्व जनसंख्या दिवस में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे संबंधित कई चुनौतियों को उन्होंने साझा किया एवं किस प्रकार से इस दिशा में बेहतर प्रयास किया जाए पी० एच० डी० स्कॉलर सुश्री सुमेधा, श्रीमती श्वेता सिंह, सुश्री ऋतुराज एवं सुश्री साई भारती ने अपने पत्र प्रस्तुत किए । धन्यवाद ज्ञापन अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ० रत्ना मित्रा द्वारा किया गया । मंच संचालन सुश्री सिमरन एवं सुश्री ने किया । इस अवसर पर डॉ कामिनी, श्रीमती अमृता कुमारी, डीओ सलोमी कुजूर, डॉ अनुराधा, डॉ० शहला जबीन, डॉ अर्पणा, डॉ० श्वेता, डॉ० केया , श्री तपन, श्री विश्व नाथ राव, श्री अर्पण अन्य शिक्षकगण एवं छात्राएँ उपस्थित थीं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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