सरिया, गिरिडीह: गिरिडीह जिले के सरिया अनुमंडल अंतर्गत नावाडीह स्थित प्राचीन राजदह धाम में आज सावन मास के पावन अवसर पर शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धा, भक्ति और आस्था से ओतप्रोत हजारों श्रद्धालु रविवार सुबह से ही पवित्र उत्तरवाहिनी बड़ाकर नदी में स्नान कर जल उठाने पहुंचे।
परंपरा और आस्था का मिलन
यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है – राजदह धाम से जल भरकर श्रद्धालु रात्रि में लगभग 45 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा करते हैं और सोमवार तड़के सुबह झारखंड धाम (झारखंडी) पहुंचकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।

राजदह धाम में स्नानध्यान के बाद श्रद्धालु मंदिर के पुजारियों से विधिवत संकल्प लेते हैं और फिर पैदल यात्रा पर निकलते हैं। पूरा वातावरण हरहर महादेव और बोल बम के जयघोष से गुंजायमान रहता है।
- इस वर्ष भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि
- इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है।
- पूरे सरिया अनुमंडल से भक्तों का निरंतर आगमन जारी है।
- बगोदर के हरिहर धाम से भी श्रद्धालु यहां जल उठाकर झारखंड धाम की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।
- मुख्य मार्गों पर चार से पांच किलोमीटर लंबी कतार तक पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं की देखी गई है।
जलाभिषेक के लिए रात्रि यात्रा
श्रद्धालु रविवार रात को जल भरकर पैदल यात्रा शुरू करते हैं और सोमवार सुबह चार बजे तक झारखंड धाम पहुंच जाते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को यह परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यफलकारी मानी जाती है।
- उत्तरवाहिनी बड़ाकर नदी को अत्यंत पवित्र माना जाता है
- राजदह धाम से झारखंड धाम तक की पदयात्रा शिवभक्तों के लिए तपस्वी मार्ग की तरह
- प्रशासन और स्थानीय सेवा समितियों द्वारा पानी, प्राथमिक उपचार और विश्राम की व्यवस्था की गई है
राजदह धाम से झारखंड धाम तक की यह भक्तिमय यात्रा न केवल धार्मिक परंपरा है, बल्कि सामूहिक एकजुटता और श्रद्धा की प्रतीक भी है। शिवभक्तों की यह आस्था यह दर्शाती है कि आज भी भारत की आध्यात्मिक चेतना जीवंत और प्रेरणास्रोत है।
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