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Saryu Rai का रेलमंत्री से सवाल ट्रेनें जमशेदपुर विलंब से क्यों पहुंच रही हैं

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On: April 1, 2026 8:32 PM
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Saryu Rai
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जमशेदपुर: पश्चिम के विधायक Saryu Rai जैसे हर शहर में रेल यातायात इतना महत्वपूर्ण है कि जब ट्रेनें लेट होने लगती हैं, तो पूरी जिंदगी अस्त‑व्यस्त हो जाती है। आज हम बात करने जा रहे हैं जमशेदपुर पश्चिम के विधायक Saryu Rai के उस जोशीले आह्वान की, जिसमें उन्होंने रेलवे और रेलमंत्री से सीधा सवाल पूछा: “ट्रेनें जमशेदपुर विलंब से क्यों पहुंच रही हैं?” और 7 अप्रैल को जमशेदपुर रेलवे जंक्शन पर धरना की तैयारियों को लेकर एक बड़ी बैठक भी हुई। अगर आप भी ऐसे यात्री हैं जो हर दिन ट्रेनों की लेटलतीफी से परेशान हैं, तो यह ब्लॉग खास आपके लिए ही है।

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Saryu Rai का रेलवे पर ‘कड़ा प्रहार’

Saryu Rai ने अपने बिष्टुपुर स्थित आवास पर हुई बैठक में रेलवे पर खुलकर नाराजगी जताई। उनका मुख्य सवाल ये था कि “देश के किसी भी हिस्से से निकलने वाली ट्रेनें जमशेदपुर में लगातार विलंब से क्यों पहुंच रही हैं?” उन्होंने रेलमंत्री से साफ‑साफ मांग की कि विलंब के कारण बताए जाएं और यही नहीं, इस बारे में जवाबदेही भी तय हो।

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ट्रेनें समय पर नहीं आ रहीं, यात्री परेशान

Saryu Rai ने कहा कि जमशेदपुर पहुंचने वाली कोई भी ट्रेन समय पर नहीं पहुंच रही। ऐसा लगता है कि यह कोई अलग‑अलग घटना नहीं, बल्कि एक नियमित पैटर्न बन गया है। यात्री घंटों–घंटों प्लेटफॉर्म पर खड़े रहते हैं, बच्चों की कक्षाएं, नौकरी के इंटरव्यू, व्यावसायिक अपॉइंटमेंट – सब बिगड़ जाते हैं।

मालगाड़ी और सवारी गाड़ियों की तरजीह

सबसे ज़्यादा बात जो Saryu Rai ने बार‑बार दोहराई, वह थी – मालगाड़ी को पास देने के लिए सवारी गाड़ियों को रोका जाना। उनका आरोप है कि मालगाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए यात्री ट्रेनों को घंटों खंड़ी रखा जाता है, जिससे सरकार को राजस्व ज़्यादा मिलता है। उन्होंने कहा–

मालगाड़ी से सरकार को फायदा है, सरकार किराया लेती है, सरकार अपना बिज़नेस बढ़ाना चाहती है, रेलवे मुनाफ़ा कमा रही है और उस मुनाफ़े को और बढ़ाने की कोशिश चल रही है।”

इस बात की पुष्टि चक्रधरपुर मंडल के यात्री‑संघों और राजनीतिक नेताओं के बयानों से भी होती है, जहां माना जाता है कि मालगाड़ी को सिग्नल देने के लिए यात्री ट्रेनों को छोटे स्टेशनों या केबिन के बाहर रोक दिया जाता है।

विदेशों में तो माफी मांगते हैं यहां क्यों नहीं?”

Saryu Rai ने एक बहुत प्रभावशाली तुलना की। उन्होंने बताया कि जब विदेशों में ट्रेन लेट होती है, तो रेल मंत्रालय क्षमा मांगता है और यात्रियों को मुआवज़ा तक दिया जाता है। यहां भी ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं? उनका कहना है कि रेलवे को सिर्फ मुनाफ़ा कमाने पर फोकस नहीं करना चाहिए, जनता का भी ख्याल रखना चाहिए

न्याय और जनता की बात

Saryu Rai ने साफ कहा कि

  • रेलवे व्यवसाय कर सकती है, लेकिन
  • यात्रियों की सुविधा और समय को भी प्राथमिकता में रखना चाहिए।
    यह बात उनके इस विचार को दर्शाती है कि रेलवे एक व्यावसायिक संस्थान नहीं, बल्कि जनहित की संस्थान है।

7 अप्रैल को जमशेदपुर रेलवे जंक्शन पर धरना

Saryu Rai की यह बैठक सिर्फ चर्चा तक ही सीमित नहीं रही। इस बैठक में तय हुआ कि 7 अप्रैल को जमशेदपुर रेलवे जंक्शन पर एक धरना आयोजित किया जाएगा, जिसका मुख्य मकसद होगा – ट्रेनों को समय पर चलने की मांग।

धरने की तैयारियां

  1. जदयू नेताओं ने स्टेशन निदेशक को पत्र लिखकर धरने की जानकारी दी है।
  2. सभी मंडलों में बैठकें आयोजित करके जन‑जागरूकता फैलाने का निर्देश दिया गया है।
  3. सोशल मीडिया का उपयोग, नुक्कड़‑सभाएं और जनसंपर्क अभियान अभियान का एक हिस्सा होगा।

भाजपा को भी लाने की कोशिश

Saryu Rai ने कहा कि इस धरने में भाजपा को भी साथ लिया जाए, क्योंकि दोनों ही एनडीए के घटक दल हैं। उनका कहना है कि यह मुद्दा राजनीति से ऊपर है, और इसपर सभी दल–संगठन एक मंच पर आकर यात्री वर्ग की आवाज़ बुलंद करें।

रेल समितियों पर भी ज़ोर

Saryu Rai ने रेलवे के साथ‑साथ रेल समितियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि:

  • रेल समितियां आखिर क्या कर रही हैं?
  • जिन लोगों को सिफारिश के आधार पर समितियों में रखा गया है, उनकी भूमिका क्या है?

इस बात से साफ है कि उन्हें लगता है कि यह समितियां अपने कार्यकाल में यात्रियों के हितों की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहीं, जिससे ट्रेन विलंब जैसी समस्या पर नियंत्रण नहीं हो पाता।

एर्नाकुलम एक्सप्रेस वाले यात्री की गवाही

बैठक में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब एर्नाकुलम एक्सप्रेस से जमशेदपुर पहुंचे यात्री भानु राव ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विस्तार से बताया कि उनकी ट्रेन कितनी देर से चली, कितनी बार रुकी और जमशेदपुर किस घंटे तक विलंब से पहुंची। यह ज़मीनी स्तर की गवाही इस बात की पुष्टि करती है कि रेलवे विभाग की तरफ से दी जा रही आधिकारिक जानकारियां अक्सर यात्रियों की वास्तविक थकान और परेशानी को नहीं दिखातीं।

रेलवे विभाग की तरफ से आम तौर पर इस तरह की देरी का जवाब दिया जाता है कि लाइन पर काम चल रहा है, मालगाड़ियों के लिए ट्रैफिक दबाव है या कुछ तकनीकी वजहें हैं

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