जमशेदपुर। झारखंड पुलिस की CID साइबर क्राइम ब्रांच ने एक बड़े ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड का भंडाफोड़ किया है। यह ठगी करीब 2.98 करोड़ रुपए की है, जिसमें जमशेदपुर के कदमा निवासी दिनेश जायसवाल को गिरफ्तार किया गया है।
CID साइबर क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, टेलीग्राम पर बनाया गया था फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म
टेलीग्राम पर बनाया था फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म
CID की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि आरोपी सोशल मीडिया, विशेष रूप से टेलीग्राम के माध्यम से लोगों को ठगते थे। उन्होंने ‘शिकागो बोर्ड ऑफ ऑप्शंस एक्सचेंज (Cboe)’ के नाम से फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म तैयार किया था, जिसमें आकर्षक रिटर्न का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए उकसाया जाता था।
निवेशकों को दिया जाता था मोटे मुनाफे का झांसा
पीड़ितों को पहले कुछ लाभ दिखाकर विश्वास दिलाया जाता और फिर बड़ी रकम निवेश के नाम पर वसूली जाती थी। यह रकम बाद में एक विशेष बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती थी।
‘जायसवाल एंटरप्राइजेज’ के नाम से खोला था खाता
आरोपी दिनेश जायसवाल ने ‘जायसवाल एंटरप्राइजेज, कोलकाता’ के नाम से इंडसइंड बैंक में एक खाता (नंबर: 201034608570) खुलवाया था, जिसमें ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी। इसी खाते से जुड़े 3.29 करोड़ रुपए के निवेश घोटाले का एक मामला सेक्टर-36, नोएडा (उत्तर प्रदेश) के थाना क्षेत्र में दर्ज है।
कई राज्यों तक फैला है नेटवर्क
CID ने बताया कि इस फर्जीवाड़े का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। जांच एजेंसी अब अन्य बैंक खातों, संचालकों और डिजिटल संपत्तियों की तलाश में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी की संभावना जताई गई है।
जनता को चेताया: सतर्क रहें और जांच-परख के बाद ही करें निवेश
CID ने आम जनता को सावधान करते हुए कहा है कि वे अनजान वेबसाइटों, लिंक, मोबाइल ऐप्स और सोशल मीडिया ग्रुप्स के माध्यम से निवेश करने से बचें। किसी भी इन्वेस्टमेंट से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म के डोमेन और यूआरएल की अच्छी तरह जांच करें और पंजीकृत वित्तीय सलाहकार (Registered Financial Advisor) से परामर्श जरूर लें।
निजी जानकारी न साझा करें, संदेह होने पर करें शिकायत
CID ने यह भी अपील की है कि OTP, बैंक खाता विवरण, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें। संदेह होने पर तुरंत टोल फ्री नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
झारखंड पुलिस की इस कार्रवाई से एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है कि डिजिटल ठगी के खिलाफ सतर्कता और सजगता ही सबसे बड़ा हथियार है।













