सरिया, गिरिडीह: सरिया में बिजली संकट, रोजगार में ठेका प्रथा और स्थानीय युवाओं की अनदेखी के खिलाफ शुक्रवार को इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) ने जोरदार प्रतिवाद मार्च निकाला। यह मार्च भाकपा माले कार्यालय से शुरू होकर पूरे बाजार क्षेत्र में घूमते हुए झंडा चौक पर नुक्कड़ सभा के साथ समाप्त हुआ।
कार्यक्रम की अगुवाई आरवाईए के जिलाध्यक्ष सोनू पांडेय ने की। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार और निजी कंपनियां मिलकर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। सरकारी विभागों और संस्थानों में पहले जहां स्थायी नौकरियां मिलती थीं, अब उन्हें आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था के हवाले कर दिया गया है। इससे युवा असुरक्षित और अस्थायी रोजगार में फंसते जा रहे हैं।
सोनू पांडेय ने कहा कि यह ठेका प्रथा बंद होनी चाहिए और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, खासकर पावर ग्रिड जैसे संस्थानों में। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरिया पावरग्रिड में बाहरी लोगों को नौकरी दी जा रही है जबकि स्थानीय शिक्षित नौजवान बेरोजगार बैठे हैं।
बिजली संकट पर भी जताई नाराजगी
सभा में सरिया और आसपास के इलाकों में हो रही बिजली कटौती पर भी लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। सोनू पांडेय ने स्थानीय विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि जबसे वे चुनाव जीते हैं, क्षेत्र की बिजली व्यवस्था बदहाल हो गई है। छात्रों, दुकानदारों और आम नागरिकों को रोजाना भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
आरवाईए ने बिजली विभाग को 7 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर 22 घंटे की नियमित बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ी तो रांची-दुमका मुख्य मार्ग को जाम किया जाएगा।
स्थानीय युवाओं को 75% आरक्षण की मांग
सोनू पांडेय ने यह भी मांग की कि पावर ग्रिड में स्थानीय युवाओं को 75% आरक्षण दिया जाए। अगर यह मांग पूरी नहीं हुई तो संबंधित विभाग के खिलाफ भी आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
सभा का संचालन और उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता आरवाईए के प्रखंड सचिव अविनाश सिंह ने की और संचालन जिला कमिटी सदस्य जिम्मी चौरसिया ने किया।
इस अवसर पर आरवाईए के प्रखंड उपाध्यक्ष खुर्शीद आलम, कुश कुशवाहा, अमन पांडेय, राहुल राज मंडल, शुभम मिश्रा, राजेश वर्मा, बिनोद मंडल, शम्भू मंडल, अक्षय यादव, सुबित मंडल, सलमान अंसारी, ज़ियाउल हक समेत दर्जनों कार्यकर्ता और नेता मौजूद थे।
यह प्रतिवाद मार्च ना सिर्फ रोजगार और बिजली जैसे अहम मुद्दों पर आवाज़ उठा रहा था, बल्कि यह भी बता रहा था कि जब जनता की बुनियादी जरूरतें अनदेखी होती हैं, तब सड़कों पर उतरना भी जरूरी हो जाता है।








